Jharkhand में Hemant Soren सरकार के सामने एक नया प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। छात्रों के उग्र आंदोलन के बाद 2014 से आयोजित JSSC – CGL परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले से उन सरकारी कर्मचारियों में भारी आक्रोश है, जो इस प्रक्रिया के तहत पहले ही नियुक्त होकर अपनी सेवा दे रहे हैं। नौकरी छीनने की आशंका के बीच इन कर्मचारियों ने अब फैसले के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। यह फैसला छात्रों के हफ्तों तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद लिया गया था, जिसमें कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे थे।
सरकारी कर्मचारी दबाव में झुकने को तैयार नहीं
विरोध कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने छात्रों के चल रहे आंदोलन के दबाव में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला किया। उनका तर्क है कि मौखिक सरकारी आदेश का इस्तेमाल उन कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के लिए नहीं किया जा सकता, जिन्हें भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त किया गया था और जो पहले से ही अपने पदों पर काम कर रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा कि इस मामले का फैसला आखिरकार अदालत करेगी और वे कानूनी तरीकों से अपनी नौकरी के लिए लड़ना जारी रखेंगे।



