देश की प्रतिष्ठित कानून universitiyo के छात्रों की ओर से CJI Surya Kant का बढ़ता विरोध हर किसी को चौंका रहा है क्योंकि देश के इतिहास में ऐसा घटनाक्रम पहले कभी देखने में नहीं आया। हम आपको बता दें कि हैदराबाद की NALSAR से उठी छात्रों की असहमति अब Bangluru की NLSIU तक पहुंच गई है और देखते ही देखते यह मामला एक दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के विरोध से कहीं बड़ा बन गया है।
इस समय स्थिति यह है कि कानून यूनिवर्सिटियों के छात्र अब सीधे उन संस्थाओं और पदों की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, जिन्हें कानून और न्याय की व्यवस्था का प्रहरी माना जाता है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में CJI Surya Kant को लेकर छात्रों की नाराजगी, BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की विवादित कार्रवाई और उसके बाद छात्रों के पक्ष में खड़ी होती कानून की युवा पीढ़ी है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि दीक्षांत समारोह में कौन आएगा, बल्कि यह है कि क्या असहमति जताने वाले कानून के छात्रों को अपनी आवाज उठाने की कीमत अपने भविष्य से चुकानी पड़ेगी । हम आपको याद दिला दें कि विवाद की शुरुआत NALSAR के छात्रों की उस आपत्ति से हुई, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर असहमति जताई। छात्रों की नाराजगी का संबंध 20 जुलाई को संसद की ओर हुए छात्रों के मार्च और उस दौरान कथित पुलिस ज्यादती से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई से था। छात्रों ने CJI की अध्यक्षता वाली पीठ के रुख को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि बाद में उन्हीं मामलों में अदालत ने छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर रोक लगाई, वीडियो और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को कहा और स्वतंत्र जांच जैसे विकल्पों पर भी विचार किया।



